Bawri ayodhya

अल्लाह तू हे, राम तू हे, तेरे अनेकों नाम क्यूँ हे,
जो नाम मुझे नहीं पता, वोह जाने बदनाम क्यूँ हे,
मस्जिद में तू हे, मंदिर में तू हे,
फिर भी इतना कोहराम क्यूँ हे,
नमाज़ पढूं या में करून आरती,
फिर भी इतना कत्लेआम क्यूँ हे,
जमीन के नीचे तू हे, उप्पर भी तू हे,
फिर तुझे छूना इतना हराम क्यूँ हे,
लगा ले गले मुझे, मिटा दे यह हर फासला,
बना दे मंदिर-मस्जिद एक, और बढ़ा दे मेरा हौसला,
फिर भले चाहे हो बेशक तेरे अनेकों नाम,
मिटा दे यह दूरियाँ, ना होगा फिर कोई तेरा नाम बदनाम,
क्यूंकि,
अल्लाह भी तू हे, राम भी तू हे